Friday, October 16, 2020

कोविड --19 का संदेश

  *कोविड -19 का संदेश* 

 सम्पूर्ण विश्व आज कोरोना संक्रमण से त्रस्त है | चारों ओर त्राहिमाम का शोर सुनाई पड़ रहा है | वायरस के संक्रमण से असंख्य लोगों की मृत्यु हो चुकी है , संक्रमण रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है | दुखद बात यह है कि इसका पूर्ण रूप से स्थायी इलाज अभी संभव नहीं हो पाया है ! कोरोना के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है जो सचमुच बेहद चिंताजनक है | 


लेकिन एक बात गौरतलब है, भारत में कोरोना की महामारी अमेरिका, ब्राजील, जापान, फ़्रांस, इटली, ब्रिटेन जैसे विकसित देशों की तुलना में अपेक्षाकृत बहुत कम है | जबकि विकसित देशों में स्वास्थ्य व्यवस्था भारत से कई गुना बेहतर है | जिससे यह कयास लगाया जा सकता है कि भारत के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत बेहतर है | संभवतः इसी वजह से कोरोना का कुप्रभाव यहाँ कम दिख रहा है | 

 कोरोना संक्रमण की रोकथाम में हमारे प्रधानमंत्री ‘मोदी जी’ की सतर्कता का श्रेय जाता है | कोविड-19 एक बहुत बड़ा गेम-चेंजेर साबित हुआ है | वैश्विक स्तर पर कोरोना वायरस ने जो युगांतकारी परिवर्तन लाया है, उसका अद्भुत् प्रभाव अब दिखने लगा है | 

 भारत में गरीबी,कुपोषण,कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था होने के बावजूद यहाँ के लोगों की इम्युनिटी अन्य विकसित देशों के लोगों से बेहतर है | इस विभीषिका के माध्यंम से प्रकृति ने हमें सुंदर संदेश दिया है ,जो चौकाने वाली है |क्योंकि,हमारी सांस्कृतिक परम्परा, जैसे—--- कीर्तन-भजन, पूजा-पाठ , परिवार को साथ लेकर चलना आदि, अच्छे संस्कारी विचारों का साइको-सोमेटिक प्रभाव स्वास्थ्य पर बहुत अच्छा होता है | अतः इस आधार पर हम कह सकते हैं कि मौलिक रूप से सनातन हिंदूवादी इस भारतीय परम्परा के जीवन्तता को बनाये रखने का संकल्प सच में कोविड-19 यह पहला अनुपम संदेश है |

 व्यकिगत अनुभव के आधार पर मैं कहना चाहूँगी कि विगत लंबे समय तक चले लॉक-डाउन में... आधुनिक विकास के मॉल, बिग-बाजार, मेट्रो, फैक्ट्री आदि सबको सुरक्षा के दृष्टिकोण से बंद किया गया | फिर भी अनाज, फल, दूध, सब्जी, अन्य जीवन रक्षक सामग्रियों का उत्पादन और इसका सभी क्षेत्रों (गाँवों, कस्बों से लेकर शहरों) में वितरण निरंतर होता रहा है| जो हमारे कुटीर, लघु, मध्यम उद्योगों तथा खुदरा व्यपारियों, ठेला- रेहड़ी वालों की उद्यमशीलता का परिचायक है | इसलिए इस सेक्टर को अधिक से अधिक विकसित करने का... यह दूसरा सुधारवादी संदेश हमें कोविड-19 देती है |

 कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग , सेनीटाईजेशन , मास्क लगाकर बाहर निकलना, साबुन से बराबर हाथ की सफाई करना , गर्म पानी का सेवन करना तथा इम्युनिटी बढाने जैसे कई महत्वपूर्ण बातें उभर कर हमारे सामने आई है | इन सभी चीजों को स्थायी रूप से अपने जीवन में शामिल किया जाय .... कोविड-19 का यह तीसरा महत्वपूर्ण संदेश है | 

 इस दौरान, सभी नदियों का दूषित जल अपने-आप साफ़ हो गया |आसमान स्वच्छ दिखने लगा |जानकारी के अनुसार नदियों में मछली, डालफिन तथा अन्य फौना के संबर्धन परिलक्षित हुए हैं |कई जगहों से हिमालय की बर्फीली श्रृंखला का दीदार हुआ | प्रदुषण मुक्त वातावरण हो, ऐसी स्थिति हमारे राष्ट्रीय नीति में स्थायी रूप से शामिल किया जाय... कोविड—19 का यह चौथा अनुपम संदेश है | 

 एक और अहम् बात , इस कोरोना काल में , ‘योग-ध्यान और आयुर्वेद’ एक वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में वैश्विक स्तर पर मान्य हुआ है | भारत नहीं पुरे विश्व में सहस्त्रों वर्ष पुरानी योग-आयुर्वेद की परम्परा को अधिक उपयोग में लाया जाय ... कोविड-19 का यह पांचवा चिकित्सीय संदेश है | 

 लॉक डाउन में सफाईकर्मी , डॉक्टर,नर्स, पुलिसकर्मी का भी अतुल्य योगदान रहा है | ये सभी योद्धा की तरह जान जोखिम में डालकर नित्य लोगों की सेवा में समर्पित हैं | निःसंदेह सभी बधाई और अभिनंदन के पात्र हैं | 

 मैं अपनी बात बताती हूँ ,मैंने लॉक डाउन को बहुत सकारात्मक रूप से लिया | कामवाली को आने से मना करने के बाद, घर के कामों को कभी बोझ नहीं समझी | हाँ, शुरू में कुछ अबुह जरुर लगा, पर बाद में सब सामान्य हो गया | पति से भी पूरा सहयोग मिला | यदि परिवार में सभी की सहभागिता की यह परिपाटी स्थायी बन जाय, तो हम कामवाली के बिना भी आराम से घरेलू कामों को निपटा सकते हैं | 


 इस दौरान एक बड़ी उपलब्धी मुझे मिली | अपने फ़्लैट की पांच महिलाओं को मैंने योग-प्राणायम सिखलाया | सोशल डिस्टेंस के नियम का पालन करते हुए, नित्य शाम के समय छत पर...मैंने उनलोगों को योग-प्राणायम सिखलाया |एक महीने के बाद सभी महिलाओं ने कहा, “प्राणायाम से स्वास्थ्य में बहुत लाभ हुआ |” जब सभी ने शारीरिक व्याधि कम होने की बात बताई, तो सुनकर मैं आनंद विभोर हो गई |

 मैं योगा ट्रेनर नहीं हूँ , लेकिन योग-प्राणायाम मेरी दिनचर्या में शामिल है | इससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में अत्यधिक लाभ होता है,यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव रहा है |

 मिन्नी मिश्रा /पटना